अब सड़क छाप दुकानदारों पर भी आयकर की नजर
आयकर मुख्य आयुक्त ए.के. चौहान ने मीडिया से चर्चा में कहा कि नगर निगम से लाइसेंसो की डिटेल लेकर अकेले इंदौर में 1 लाख 67 हजार व्यापारियों को नोटिस भेजे गएं हैं और भोपाल में भी करीब 60 हाजार व्यापारियोंं को नोटिस दिया गया है। जो गुमास्ता लेकर सड़कों पर चाय, समोसा, बड़ा पाव आदि बेचकर अपना एवं अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं, अब वो भी आयकर के दायरे में आएंगे। हमारा मानना है की कुछ दुकाने इस तरह के दायरे में आने लायक जरूर हैं क्योंकि कुछ दुकाने बेहद चलती हैं। लेकिन ज्यादातर अपना खर्च निकालने में भी असर्मथ हैं।लेकिन सरकार ने एक तरफ से नगर निगम एवं गुमास्ता से लाइसेंस की डिटेल निकालकर सभी को नोटिस भेजे हैं। जोकि किसी भी तरह से सही नहीं है। 90 प्रतिशत सड़क पर चाय पकौड़े बेचने वाले इस पोजीशन में कहीं से कहीं तक नहीं आते हैं। वो बेचारे पूरी जिंदगी में 2 कमरे का मकान और बच्चों की शादी ही कर पाते हैं। अगर आयकर विभाग को कर वसूली बढ़ानी है तो इसी इंदौर भोपाल में इतने बड़े-बड़े कर चोर हैं जिन्होने 20-20 करोड़ की कोठियां एवं फॉर्महाउस बना रखे हैं और उनको बनाने में 60 प्रतिशत ब्लैक मनी का इस्तेमाल हुआ है। इंदौर में ऐसे-ऐसे बंगले हैं जो 3 एकड़ से लेकर 9 एकड़ तक में फैले हुए हैं और उनकी साज सज्जा पर जो पैसा खर्च हुआ है वो कल्पना से बाहर है। इनके गार्डन सजाने के लिए बम्बई से हवाई जहाज से इंटीरियर आते हैं एवं इनके बंगलों में 50 हजार से 1 लाख रूपये तक के खूबसूरत पौधे आते हैं। इंदौर में इतने रहीस हैं कि अगर आयकर विभाग सही मायने में कार्रवाई करे तो इन गरीब गुमठी ठेले वालों को नोटिस भेजने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। इन लोगों को नोटिस देखकर ही बुखार चढ़ जाता है क्योंकि यह इनकी जिंदगी में पहली बार हो रहा है। आयकर विभाग को इस साल का जो लक्ष्य दिया गया है। वो पिछले साल की अपेक्षा डबल से भी ज्यादा है। इसका मतलब यह भी नहीं है कि आम मेहनत- मजदूरी एवं जूठे चाय के गिलास धोने वाले, जूठी प्लेटे उठाने वाले गुमठी में बड़ापाव बेचने वाले लोगों को परेशान किया जाए। आज जो कपड़े सिलने वाले बड़े टेलर हैं एवं बड़े-बड़े हेयर स्पॉ जिनकी आमदनी आयकर के दायरे में आती है एवं कई रेस्टोरेंट, बार, हास्पिटल,डॉक्टर इनके ऊपर कार्रवाई होनी चाहिए। आज मार्केट में कितना काम जैसे हार्डवेयर, टाईल्स, मारवल, बड़ी-बड़ी मिठाई की दुकाने ऐसे बहुत सारे प्रतिष्ठान जो टैक्स की चोरी करते हैं अगर उन्हें शिकंजे में लिया जाए तो आयकर का कुछ भला हो सकता है। फालतू में छोटे दुकानदारों को नोटिस देकर परेशान करने से कुछ भी हाथ नहीं आने वाला। हम मानते हैं कि कई समोसे कचौड़ी वाले एवं मिठाई वाले आयकर विभाग कि हद में आते हैं अत: विभाग को चाहिए कि उन्हें अपने सहयोगियों द्वारा चिन्हित कर नोटिस भेजे या उन प्रतिष्टानों का सर्वे करें। सरकारी ब्यूरोक्रेट्स को भी ध्यान में रखकर क्योंकि सबसे ज्यादा काला पैसा इन्ही लोगों के पास है। यह फैक्ट है। जितने ब्यूरोक्रेट्स पर आज तक जो भी छापे पड़े हैं उनकी जानकारी सबके सामने हैं। एक छोटे से पुलिस इंस्पेक्टर या बाबू या किसी भी विभाग का कर्मचारी, अधिकारी का घर देखलो तो किसी हवेली से कम नहीं है और उसके अंदर जो इंटीरियर है उसको देख के तो छापे बालों की आंखे खुली रह जाती हैं। आज तक एक भी केस जो सरकारी कर्मचारी पर हुआ उसकी सेलरी से सौ गुना से कम कोई नहीं मिला। व्यापारी और उद्योगपति तो ज्यादातर बैंक लोनों एवं सरकारी टैक्स एवं सरकारी देनदारियों में ही मारा जाता है। आयकर विभाग को अगर 29 हजार करोड़ का साल का लक्ष्य पूरा करना है। तो कुछ ऐसे कदम उठाने पड़ेंगे जिसमें उनके विभागीय एवं ब्यूरोके्र्टस और राज्य सरकार के अधिकारी एवं
पॉलिटिक्स के ऊपर हाथ डालने की हिम्मत दिखानी पड़ेगी। बेचारे गरीब आदमी को परेशान करने से सिर्फ बेरोजगारी बढ़ेगी और आम आदमी का शोषण होगा। आज भी दिल्ली एवं मुम्बई जैसे शहरों में ब्लैक मनी का शेयर प्रोपर्टी खरीदने में 50 प्रतिशत हैं। केवल मुम्बई वा दिल्ली को ही खंगाल लिया जाए तो सरकार के पास इतना पैसा आ जाए कि छोटे लोगों को परेशान करने की आवश्यकता ही न पड़े। लेकिन चूंकि जो पैसे वाले लोग हैं उनके सम्पर्क वहां तक हैं कि उनके ऊपर हाथ डालने में प्रशासन 10 बार सोचेगा।............. धन्यवाद